napoleon
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फिल्म ‘नेपोलियन’ में फ्रांसीसी नेता के सत्ता में आने के साथ-साथ महारानी जोसेफिन के साथ उनके संबंधों को दर्शाया गया है। इस फिल्म में नेपोलियन की भूमिका जोकिन फीनिक्स और नेपोलियन की पत्नी जोसेफिन की भूमिका वैनेसा किर्बी ने निभाई है। इस फिल्म का निर्देशन रिडले स्कॉट और फिल्म की कहानी डेविड स्कार्पा ने लिखी है। अभिनेता जोकिन फीनिक्स पीरियड ड्रामा में डार्क फिल्मों में अपरंपरागत किरदार निभाने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें एक अकादमी पुरस्कार, एक ब्रिटिश अकादमी फिल्म पुरस्कार, एक ग्रैमी पुरस्कार और दो गोल्डन ग्लोब पुरस्कार सहित विभिन्न पुरस्कार प्राप्त हुए हैं । साल 2020 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने उन्हें 21वीं सदी के महानतम अभिनेताओं में से एक बताया था। इस फिल्म का निर्माण भी उन्होंने किया है।  अभिनेत्री वैनेसा नुआला किर्बी मिशन: इम्पॉसिबल फिल्म की सीरीज के अलावा कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं। वैनेसा नुआला किर्बी को फिल्म ‘पीसेस ऑफ अ वूमन’  के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए अकादमी पुरस्कार के लिए नामांकन प्राप्त किया।

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Napoleon Movie Review in Hindi Ridley Scott David Scarpa vanessa kirby joaquin phoenix
नेपोलियन रिव्यू – फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म ‘नेपोलियन’ की शुरुआत मैरी एंटोनेट के सिर काटने से होती है, जिसे नेपोलियन बोनापार्ट लापरवाही से देखता है, उसे ऐसा लगता हैं कि जिस सत्ता की तलाश में वह है उसके लिए मैरी एंटोनेट एक बाधा थी। फिल्म में बोनापार्ट के मामूली तोपखाने के कमांडर से लेकर नेपोलियन प्रथम, फ्रांस के सम्राट बनने तक के  सफर को दिखाया गया है। कुछ ही वर्षों में नेपोलियन जनरल पद पर आसीन होकर  पूरी दुनिया को जीतने की क्षमता रखता है और पंद्रह वर्षों में वह फ्रांस का सम्राट बन जाता है। नेपोलियन को सत्ता पर काबिज लोग बड़े ओहदे के लायक नहीं समझते हैं। लेकिन वह सिकंदर और सीजर के नक्शेकदम पर चलते हुए  अपने सपने को पूरा करता है।  यह फिल्म नेपोलियन के करियर का एक शानदार सफर पेश करती है। लेकिन नेपोलियन के जीवन के ऐसे बहुत सारे पहलुओं को फिल्म में नजरअंदाज कर दिया गया है।

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नेपोलियन रिव्यू – फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस फिल्म में निर्देशक रिडले स्कॉट ने यह बताने की जरूरत नहीं समझी कि नेपोलियन कौन है और वह क्या चाहता है? नेपोलियन के बारे में जानना है तो इस फिल्म से ज्यादा जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध है। फिल्म की शुरुआत मैरी एंटोनेट के सिर काटने से होती है। मैरी एंटोनेट कौन है, उसका सिर क्यों काट दिया जाता है। सिर कटने से पहले दिखाया गया है कि वहां की जनता उससे बहुत नफरत करती है,लेकिन इसके पीछे की वजह क्या है,यह फिल्म में स्पष्ट नहीं होती है। नेपोलियन ने अपने जीवन में 21 युद्ध लड़े हैं, इस फिल्म में छह युद्ध का उल्लेख किया गया है। लेकिन इस फिल्म को देखने के बाद यह स्पष्ट नहीं होता है कि नेपोलियन  कोई विशेष लड़ाई क्यों लड़ रहा है या किसी विशेष संधि पर हस्ताक्षर क्यों कर रहा है?

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नेपोलियन रिव्यू – फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म में युद्ध के सीन काफी शानदार हैं। लेकिन फिल्म के ज्यादातर सीन्स को बर्फीले और धुंध में ऐसे शूट किया गया है कि पता ही नहीं चलता है कि कौन जीत रहा है और क्यों ? इतना ही नहीं स्क्रीन पर लिखे कैप्शन से पता चलता है कि कौन डायलॉग बोल रहा है। युद्ध के मैदान से अचानक नेपोलियन को गिरजाघर और महलों में दिखा दिया जाता है। फिल्म को देखने के बाद ऐसे लगता है कि इस फिल्म की शूटिंग डाक्यूमेंट्री फार्मेट में हुई है और सभी दृश्यों को जोड़कर कर सूत्रधार के माध्यम से कहानी आगे बढ़ा दिया गया हो। फिल्म के दृश्यों का आपस में तालमेल नहीं दिखता है। फिल्म की कहानी शुरू से लेकर अंत तक भटकी सी लगती है।

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नेपोलियन रिव्यू – फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिनेता जॉकिन फीनिक्स ने नेपोलियन के किरदार में एक शानदार प्रदर्शन किया है, जिसमें युद्ध के मैदान से लेकर महारानी जोसेफिन के साथ जटिल रिश्ते को दिखाया गया है। महारानी जोसेफिन के किरदार में  वैनेसा किर्बी अपना प्रभाव छोड़ती हैं। फ़्रांसिसी क्रांति के राजनेता की भूमिका में ताहर रहीम, आर्थर वेलेस्के की भूमिका में  रूपर्ट एवरेट , फ्रांसीसी आक्रमण के कमांडर की भूमिका में  मार्क बोनर का काम उल्लेखनीय रहा। फिल्म के लेखक  डेविड स्कार्पा ने नेपोलियन के जीवन के लगभग तीस वर्षों को फिल्म में दिखाया है। यह फिल्म फ्रांसीसी नेता के व्यक्तिगत और ऐतिहासिक दोनों पहलुओं के बारे में है, लेकिन फिल्म देखने के बाद ऐसे बहुत सारे सवाल अधूरे रह जाते हैं, जिसे फिल्म के निर्देशक रिडले स्कॉट पूरा नहीं कर पाए।

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नेपोलियन रिव्यू – फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

दो घंटे 40 मिनट की फिल्म में नेपोलियन के पूरे जीवन यात्रा को दिखाना मुश्किल है, लेकिन फिल्म के शुरुआत में नेपोलियन के चरित्र को ऐसा पेश किए जाने की जरूरत थी कि दर्शक समझ सके हैं कि नेपोलियन का चरित्र क्या है? इस फिल्म को देखने का तभी आनंद है जब आप नेपोलियन के किरदार को पहले से पढ़ लें, फिर फिल्म देखें। फिल्म की सबसे अच्छी बात है फिल्म की सिनेमैटोग्राफी। सिनेमैटोग्राफर डेरियस वोल्स्की ने युद्ध के इन दृश्यों को बहुत ही शानदार तरीके से फिल्माया है।

One thought on “Napoleon Review: फिल्म देखने से पहले इतिहास को पढ़ना जरूरी, नहीं तो सिर के ऊपर से निकल जाएगी फिल्म”

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